जो डोली उठेगी तेरी
एक जनाजा मेरा भी होगा
फर्क सिर्फ इतनी होगी
एक तरफ खुशियां
और एक तरफ मातम होगा
एक तरफ जहां फूलों से
सजा होगा दामन तेरा
और एक तरफ कफन में
लिपटा होगा ये दीवाना तेरा
लोग तो दोनों तरफ होंगे
फर्क सिर्फ इतना होगा
एक तरफ बिदा तुम
दुल्हन के जोड़े में होगी
और एक तरफ बिदा मैं
लिपटा कफन में होउंगा
ले कर कुछ अरमान अधूरे
जो हो ना सके पूरे
पर खुश रहना सदा
हम कभी ना कभी तो मिलेंगे
जो आज रह गया हैं अधूरा
उसे वहाँ पूरा करेंगे
- विनय

