गलियां जहाँ पे तेरी

खुशबू से महका करती हैं अब भी


मैं उन राहों को चूम के गुजरता हूं

तुम होती नहीं पर तेरी महक से महक जाता हूँ


तेरी साँसों को महसूस करके 

अब भी मैं जीता नहीं जी लेता हूँ



-विनय