मोहब्बत यूँ रुस्वा ना होती
अगर इश्क़ तुझसे ना होती
हमने तो किया था सौदा दिल का
पर रुस्वाई तो ना मांगी थी
और तन्हा जो छोड़ चले जाना था
तो दिल ही क्यो लगाना था
चैन से जीता था पहले
अब जी कर भी जी ना पाता हूँ
बंजारों सा हो गया हूँ अब
कभी इस गली तो कभी उस गली नजर आता हूँ
अपनो की नजरों से ओझल तो था ही
अब परायो में भी कहीं दिख ना पाता हूँ
- विनय