छट जायेंगे बादल ये अंधकार के और लौटेगा सवेरा

फिर सुनाई देगी वो चिड़ियों की चहचहाहट वो बारिश की बूंदें

बस हौशला ना हारेंगे राह कठिन हैं

पर जीत जायेंगे हम

दुश्मन छुपा बैठा हैं पर हौशला बुलंद हैं

लाख कठिनाइयां सही हाथ से हाथ मिला लड़ेंगे हम

और दुश्मन नासमझ कितना फड़फड़ायेगा

एक ना एक दिन वो घुटनों पे आयेगा

हौशला बुलंद हैं

हर जख्म की कीमत वो चुकायेगा

छट जायेंगे बादल ये अंधकार के और फिर वहीं सवेरा लौट आएगा।


- विनय