बड़ा नाज हैं उनको खूबसूरती पे अपने
लगता नहीं दिल भी कभी देखा हैं अपना
होता हैं क्या दिल का टूटना
कभी मेरे दिल से पूछा करो
और खुद को देख जो इतरा गये हो
तेरा वो आईना तुझ जैसा ही ठहरा
जो देखना हो दिल अपना
कभी मेरे घर भी आया करो
यकीनन देख ना पाओगे
सच संभाल ना पाओगे
लगते हो जो मासूम इतने
सच्चाई देख फिर खुद को ना देख पाओगे
क्योकि वो पागलो सा भटकता हैं अब भी
तेरा नाम उन्ही दीवारों पे लिखा करता हैं अब भी
- विनय

