वर्तमान बस यही है हम दोनों का तू एक जर्जर होती हवेली है और मैं तेरा बूढ़ा द्वारपाल कि अब, हमारे कबूतर आँगन में नहीं आते, दाना नहीं खाते, गुटर-गूँ कर जीवन का राग नहीं सुनाते हाँ ये सच है मेरी बेगम कि तू एक जर्जर होती हवेली है और मैं तेरा बूढ़ा द्वारपाल