कुछ बरस पहले कागज़ के टुकड़े पर फैसला आ गया मैं बैठा सोचता रहा वो ईश्क की नींव हिला गया
अब कोई इस घर की देखभाल नहीं करता यहां आंगन सूना और आईना खामोश है जलते हुए घरौंदे में रोज इक चीज जल जाती है और राख के बीच कायम रह जाती है तेरे आने की 'उम्मीद'