
कलम से बात क्या निकली
सरकार सफाई देने पर आ गयी
सच की एक आवाज़ क्या उठी
हुकुमरानों की भृकुटियां तान खा गयी
गांठें अब जो खुल रही है
तो शिखाएं तो लहरायेगी
चंडी बन खड़ा चाणक्य
आंच ना भारत पर आएगी
सुनो, चाटूखोरों-नमकहरामो
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