कलम से बात क्या निकली
सरकार सफाई देने पर आ गयी
सच की एक आवाज़ क्या उठी
हुकुमरानों की भृकुटियां तान खा गयी
गांठें अब जो खुल रही है
तो शिखाएं तो लहरायेगी
चंडी बन खड़ा चाणक्य
आंच ना भारत पर आएगी
सुनो, चाटूखोरों-नमकहरामों
दिन तुम्हारे लद गए
भारती के लाल देखो रण में जो उतर गए
अब तो केवल संग्राम होगा
अधर्म का विनाश होगा
राजसिंहासन डोलेंगे
घमंड कदमो तले दम तोड़ेंगे
तुम अखण्डता की हुंकार सुनो
सत्य की पुकार सुनो
विजय की जयकार सुनो