चूल्हे से उठता धुंआ देख
लो भागाभागा कालू आया
दूम हिलाता मुझे बुलाता
भौं-भौं कर अपनी भूख जतलाता
तभी देखो श्यामा रंभाई
मैं दौड़ी-दौड़ी उसको उसकी गुड़-रोटी दे आई
इतने में मम्मी ने आवाज लगाई
मैं बोली चल मुन्नी
अब तेरे खाने की बारी आई
(बारी=मौका,अवसर)


