मम्मी जब भी रोटी बनाती जाने कहां से चींटी आती नीचे गिरे आटे को,  मुंह में लपेटे धीरे से चली जाती एक जो जाती तो दूजी आती चींटीयां,आती और जाती
चूल्हे से उठता धुंआ देख लो भागाभागा कालू आया दूम हिलाता मुझे बुलाता भौं-भौं कर अपनी भूख जतलाता तभी देखो श्यामा रंभाई मैं दौड़ी-दौड़ी उसको उसकी गुड़-रोटी दे आई इतने में मम्मी ने आवाज लगाई मैं बोली चल मुन्नी अब तेरे खाने की बारी आई (बारी=मौका,अवसर)