एक ख्वाब रोज़ आता है
हकीकत को झुठलाता है
अचेत पड़े मन को
उम्मीद नयी दे जाता है
हाँ, एक ख्वाब रोज़ आता है
फिर ये उम्मीद
हकीकत को विनम्रता बतलाती है
मन के आगे झुकना सिखलाती है
राही को जगाती है
मंजिल की ओर बढाती है
टूटे हुए का फिर से जोड़ा सजाती है
जीवन को सुहाग बनाती है