वो तेरी नजरों में मेरे अक्स का ठहरना, अच्छा लगता है,
चांद से चेहरे पर बिंदिया बन चमकना, अच्छा लगता है।
चलती है जब शाम को हवा, वो तेरी गोद में सर रखना, अच्छा लगता है,
हमको तो तेरे संग हल्की बारिश में भीगना, अच्छा लगता है।
सयाह रात में वो तेरा जुगनू बन चमकना, अच्छा लगता है,
मेरी रूह का तेरी रुह तक का वो सफर तय करना, अच्छा लगता है।
ना तुम बोलें ना हम बोलें,
ऐसे संगीत का सूनापन, अच्छा लगता है।
ना कोई रिश्ता ना कोई रिवाज,
उन्मुक्त दिलों का ये संगम, अच्छा लगता है।