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जीवन माटी का है ढेला

Bhupendra SinghBhupendra Singh March 14, 2022
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जाने की अब है तैयारी

दिल पर बोझ बहुत है भारी

जीवन माटी का है ढेला

दिल ने कितना कुछ है झेला


ज़ब्त बहुत था अपने दिल में

पर हिम्मत वो हार गया था

दुनियां से लड़ते लड़ते ही

दिल को अपने मार गया था।


सबकी है बस एक कहानी

ना राजा है ना कोई रानी

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