राम नाम का मतलब क्या,

जब पूण्य भरी ही त्वचा नहीँ?

जब वर्तमान में

सत्व राम का

कण भर भी कहीँ बचा नहीँ

जहाँ राम रूप में बैठे दशानन

पग-पग पूजे जाते हैं

जहाँ लेकर हरि का नाम युद्ध में

नकली बन्दर जाते हैं

जहाँ व्यक्ति

बजरंगी से बढ़कर

भक्त बना मंडराता हो

जो राम बने बैठे रावण को

ही फिर धोक लगाता हो

जहाँ झूठ रोजाना टी.वी. पर

सच्चाई को झुठलाता है

और लंका कह कर आग राम की

कुटिया में लगवाता है

जिस नाटक की पटकथा

है बिल्कुल विपरीत असलीयत से

जिसके सारे संवाद लिखे सत्ता ने

अपनी नीयत से

जहाँ होगा बिल्कुल वैसा ही

जैसा इक रावण चाहेगा

उस नाटक का मंचन होगा तो

केवल भ्रम ही आएगा

कोरा भ्रम ही आएगा ।