तेरी चप्पलें देखी चौखट पे तो हम भी आए सनम नाचते-नाचते

मन में कितने ही अरमान पकने लगे दौड़ पाए कदम नाचते-नाचते।


पँख ही आ गए ख्वाइशों के इधर, पैर थम-थम के ऊपर को उठने लगे

पनकॉवा, टिटहरी,कबूतर, बया, पा गए सब जनम नाचते-नाचते


मन में चारों तरफ अफरा-तफरी मची, कितने हंगामे कितनी न मस्ती हुई

शेर, गीदड़, गिलहरी, छछुंदर, हिरण सब मचाते उधम नाचते नाचते।


ज़िंदगी सुर की शिक्षा भी लेने लगी "सा रे गा मा पा धा नी सा" सरगम सजी

और हुए धीमसा,लावणी,बीहू,कत्थक,भरतनाट्यम नाचते-नाचते।


घुँजने लग गयी शोर गुल से गली बंद कानों के पर्दे उतरने लगे

ढाक, डमरू, नगाड़ा, जुड़ी-नागरा, ढ़ोल बाजे धमम नाचते नाचते।


ज्यूँ मुलाकात के चार पल आ गए गूज़बम आ गए, अक्ल थर्रा गई

कितनी बातें बनी, कितने सपने बने, कितने आए वहम नाचते-नाचते।