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असमंजस


एक असमंजस सी है दिल मेकी वो आने के लीए जाता है...

की जाने के लीए आताइस बात को मे आया हुआ वसंत समजु

की फीर से आने वाला पतझड...की दील बस यही असमंजस सी है....

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