रातों की तन्हाइयों को इस कदर गवारा हूं मै।
साथ चलती हैं मेरे, एक ऐसा बंजारा हूं में।।
बड़ी बेवजह , बेमंजिल चल रहा था मैं।
गहरे तमस में जो तुमसे मिला वही उजियारा हूं मैं।।
जो कुछ मिला तुमसे, वो ज़िन्दगी की मिठास है,
मैं समंदर नहीं, मगर बेइतिहा खारा हूं मैं।।
बादल हूं संजोए हुए लाखों दुआएं।
तो क्यूं फिर भी इल्ज़ाम यही कि आवारा हूं मैं।।
अपने आसमां में थोड़ी ही जगह दे,
तू मेरा चांद है, तेरा ही तारा हूं मैं।
इक चेहरा आंखों में लिए कई मौसम गुजारा हूं मैं।
बरसो से किनारे की चाह रखे झील में ठहरा सिकारा हूं मैं।।
ओस की बूंद ना समझो मुझो, बारिश का इशारा हूं मैं।
गजलों में तुम्हारा ज़िक्र ना करू तो शायर एक नकारा हूं मैं।।


