कितना मुश्किल हो सकता है

किसी की उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतरना

तुमने भी तो किया न

मेरे ख्वाबों को चकनाचूर।

जब पूछा मैंने एक सवाल तुमसे

क्या मैं तुम्हारा पहला प्यार हूं?

मुस्कुराकर तुमने गले लगाया

और बोला एक मैं ही हूं तुम्हारी जिन्दगी का नूर।

जब देर से आते थे तुम घर...

मैं बेचैन नज़रों से इंतज़ार करती थी

तुम्हारे ना होने से अकेली थी

इसलिए तो दौड़ कर दरवाजे पर आ जाती थी।

समझा लिया करती थी अपने मन को

ये मानकर की तुम्हारी झुंझलाहट थकान है

पर ये समझना नहीं चाहती थी

की शायद मेरा इश्क़ ही गुमनाम है।

- भव्या परी