जब तक मैं एक घाव हूं
तब तक है बाहर से चोट
मैं भीतर से जैसी बनी हूं
वैसे ही तो बाहर से घाव
मिलेंगे
मेरे भीतर बने हुए घाव का
उस पर पड़ रही चोट की
जिम्मेदार मैं स्वयं हूं
मेरे पट्टी करने से घाव ठीक
नहीं होगा
घाव का मरहम है अज्ञेय
जो बिना मेरे हैं
मेरा मिटना है अज्ञेय के हाथ
एक पत्ता भी नहीं हिलता
अज्ञेय की मर्जी के बिना
भावना कुमारी व्यास
3/4/2023
