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मन की गहराइयाँ

मन की गहराइयों में ही भीड़ जाता

सही और गलत की कश्मकश में

खुद ही कभी अपनों से उलझ जाता,

खुद के उद्दत शब्दों से टूटता

खामखा तिनको सा बिखर जाता,

आँखों में नम से अरमान लिए

उजाले के सपने बुनते जाता,

मन की गहराइयों में ही भीड़ जा

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