होली


होली है रंगों का त्यौहार,

जीवन में भर देता है रंग हजार।

बैर भुलाकर शत्रु बन जाते है मीत,

बरसों से चली आ रही है रीत।

ठंडाई की गिलास,

देती है शीतलता का आभास।

गुझिया की मिठास,

मन को देती है सुखद अहसास।

रसायन युक्त रंग हटाते है,

शालीनता से होली मनाते है।

“सजग” अपने मन का मैल मिटाते है,

अबकी बार होली नए तरीके से मनाते है।



कवि - भाविन जैन "सजग"