"चिड़ियाघर"
आज रविवार का दिन था। सभी लोग साथ बैठकर सुबह का नाश्ता कर रहे थे। तभी जयेश ने कहा कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाते है। जयेश की पत्नी सविता ने कहा हमें मॉल में चलना चाहिए, जयेश के बच्चों ने कहा हमें वाटरपार्क चलना है। इस विषय पर बड़ी देर तक चर्चा के बाद सबने मिलकर तय किया की हम लोग चिड़ियाघर चलेंगे।
सुबह के 9 बज रहे थे, भोजन की तैयारियां शुरू हो गई थी। आज भोजन हर रोज की तुलना में जल्दी बनाया जा रहा था, क्योंकि सबने मिलकर 11 बजे चिड़ियाघर की ओर निकलने तथा 3 बजे तक घर वापस लौटने की योजना बनायी थी।
घड़ी में 10 बजकर 30 मिनिट का समय हो रहा था, चारों सदस्य भोजन कर चुके थे। सविता ने भोजन के बाद बर्तनों की सफाई की तथा इसके बाद सभी तैयार हो गए। चारों सदस्य कार में बैठकर चिड़ियाघर की ओर निकल गए।
चिड़ियाघर पहुंचने के बाद एंट्री टिकट लेकर सब चिड़ियाघर के अंदर पहुंच गए। रविवार का दिन होने के कारण आज चिड़ियाघर में बड़ी भीड़ थी। जयेश ने अमन और शैली को समझाया कि ज्यादा भीड़ होने के कारण दोनों हाथ पकड़कर मम्मी – पापा के पास ही रहेंगे।
चारों मिलकर चिड़ियाघर में बारी – बारी से बंदर, भालू, चिड़िया, खरगोश, हिरण, तितली, बाघ आदि को देखने लगे। इस चिड़ियाघर की विशेषता थी, कि आस पास के क्षेत्र में मोर केवल यहीं पर थे। इस कारण यह बहुत प्रसिद्ध था।
अमन ने मोर को नाचते देखकर शैली से कहा “ये देखो मोर नाच रहा है” मोर को देखकर शैली काफी खुश हो गई। मोर को नाचते हुए देखने का मजा ही अलग है। इसके बाद सब मिलकर खरगोश को पास से देखने के लिए जाते है। खरगोश को देखकर अमन और शैली खरगोश के साथ खेलने लगते है। सभी काफी देर तक घूमने के बाद घर लौटने के लिए बाहर आ जाते है, तभी अचानक जयेश रुक जाता है और शैली से पूछता है “अमन कहां है” शैली कहती है “मुझे नहीं पता”।
दरअसल चिड़ियाघर से बाहर आते समय रास्ते में भीड़ के कारण अमन का हाथ छूट गया था और वह चिड़ियाघर के अंदर ही रह गया। जयेश, सविता और शैली को कार में बैठाकर अमन को लेने चिड़ियाघर के अंदर जाता है, उसे रास्ते में भीड़ बाहर की ओर भागकर आती हुई नजर आती है, ये सब देखकर जयेश हैरान हो जाता है, और बाहर आते एक आदमी से पूछता है “सब लोग इस तरह भागते हुए बाहर क्यों आ रहे है?”
“अरे अन्दर शेर पिंजरे से बाहर निकल कर आ गया है।“ उसने कहा।
यह सुनकर जयेश जल्दी से अंदर की ओर भागा, वहां आस पास भीड़ नज़र आ रही थी, लेकिन अमन कहीं नजर नहीं आ रहा था। आस पास अमन को नहीं पाकर जयेश घबरा गया था। कुछ दूरी पर चलने के बाद उसे अमन जमीन पर लेटा हुआ नजर आया। जयेश ने तुरंत अमन को उठा लिया और उसे बाहर ले आया।
कार में बैठकर जयेश ने अमन से पूछा तुम वहां लेटे हुए क्यों थे। तब अमन बताता है, कि “हाथ छुटने के बाद उसने आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन वह नीचे गिर गया इतने में एक शेर मुझे सामने आता हुआ नजर आया। मैंने शेर को अपने पास आता देखकर अपनी सांस रोक ली, जिससे शेर मुझे छोड़कर वापस पिंजरे की ओर पलट कर जाने लगा। इतने में आप आ गए और मुझे उठा लिया।“
“तुम्हें कैसे पता चला कि शेर के पास आने पर सांस रोक लेना चाहिए।“ जयेश ने पूछा।
“एक बार दादाजी ने कहानी सुनाई थी, जिसमें बताया था कि शेर के पास आने पर सांस रोक कर लेट जाना चाहिए।“ अमन ने बताया।
इसके बाद सभी लोग घर आ गए।
बच्चों को कहानियों के द्वारा कई बातें सिखाई जा सकती है, जो उनके जीवन में काम आ सकती है।
यदि हम बच्चों के साथ किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर जाते है, तो उनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
✍ भाविन जैन "सजग"

