समस्याओं से लतपथ जीवन हमारा
कब तक करेंगे ऐसे बताओ गुज़ारा
हर क्षण लिप्त है दुविधाओं में मानों
परन्तु फिर भी मोह ना इससे हारा।
पाने की प्रतिदिन की दौड़ है कोई
छूट रहा पीछे अपना कोई प्यारा
आस तके पुनः ख़ुशियों की सभी
बस मिल जाए सबको कोई सहारा।
मोह माया के धागे है कच्चे देखो
छोटा पड़ रहा सबको घर बेचारा
पूरे करने को सपने सब अपने
लगा रहे अपना तन, मन धन सारा।
इससे पहले की अंत आ जाए
बस न चले फिर उस पर हमारा
समेट लो अपनों को प्रेम से
कि ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा
समस्याओं से लतपथ जीवन हमारा।
पूजा


