शब्दों की चोट अक़्सर व्यक्ति को गहरी ठेस देती है
समय के साथ भूलने भी नहीं देती है
सब ठीक होकर भी ये शब्द रह जाते हैं कानो में
इन्हें भूलकर अक़्सर व्यक्ति को जीने नहीं देती है।
पछतावा रह जाता है बाद में बस
निकल जाते है शब्द गलत कब
कड़वाहट में अक़्सर लोगो को ये
होंठ सीने नहीं देती हैं
इन्हें भूल अक्सर व्यक्ति को जीने नहीं देती है।


