कहना था मुझे, पर कह न सकी

बिन कहे भी तुमसे, अब रह न सकी

कि दिल और दुनिया तुम्ही से है

तुमसे दूर होकर भी,दूरी सह न सकी।


भावों में और किसी के, बह न सकी

टूटी तो बहुत वैसे, पर ढह न सकी

रहना है बस तेरी होकर अब सदा

कहना था मुझे, पर कह न सकी।