सच्चाई की डगर से जाना नहीं

मुश्किल कितनी भी आए

घबराना नहीं

कुछ पलो के काले बादल होते है

सम्भलना ज़रा

भीग जाना नहीं।

आगे मौसम सुहाना मिलेगा

गम का न ठिकाना मिलेगा

होंसलों का छाता ढके रखना

सम्भलना ज़रा

भीग जाना नहीं

घबराना नहीं।