हौसला  डरना क्योँ, रुकना क्योँ, अँधेरे से हारना क्योँ ? तू भी पागल है सच में, तेरे अंदर के हौसले की लौ को नकारा क्योँ ?
बुलंद इरादे वाले,
अरे ज़रा सपनों को फलक तक पहुँचने दे,
आधा उड़ चूका,
आधा बाकी और है, उड़ने तो दे,
फिर देख,
कामयाबी का तारा तेरे कदम नहीं चूमेगा क्योँ ?