चाहत है थाम लूँ इन लम्हों काे,
है जिनमें मंद मंद खुशी ।
आज होता है एहयास,
उन बीते पलों में खुशी की थी कितनी मद्होशी ।।
कुछ पल की खमोशी है ,
पर आज भी उम्मीद में कहीं न कहीं मद्होशी है ।
जब तक है होशमंद जिंदगी,
किसी न किसी को हमसे बेरुखी है ।।
टूट गया ये दिल बेचारा,
जब हुआ एहयास हमें ।
किसी ने दिया न साथ,
जरूरत के समय ।।
न था हाथ किसी अपने का,
पोंछने को हमारे आंसु ।
भरी थी खुदगर्जी उन में ,
और जज़बातों पे न था काबू ।।
छोड़ गए हमें तड़पता,
जीवन के अंधेरों में ।
तज गए हमें वो,
अक्षकों के सैलाबों में ।।
दौड़ गए जीवन में आगे,
पाने को वो नए मुकाम ।
पर भूल गए ये बात,
कि वक्त की अब भी खुदा के हाथ में है लगाम ।।
फिरा जब समय उनका,
बन गए वो हमारे जीवन में गुज़री दास्ताँन ।
न रहा उन का भी कोई स्थान,
हर पल जो हमारे दिल में थे विराजमान ।।
आज भी हृदय हमारा है शादमान ।
क्योंकि है ये एहयास हमें,
कि परवरदीगार तो अब भी है सायबान ।।
मिली जब हमें नई मंजिल ।
महसूस हुआ कि जैसे,
रेगिस्तान से निकल कर मिला हो साहिल ।।
पाई तरावट फिर से विचारों में ।
और हुआ महसूस कि,
उकाबों की तरह अब भी उड़ना है आसमानों में ।।
ध्यान रखना है बीते तजुर्बों को ।
मिलेगी जान उनसे आगे के ख्वाबों को ।।
पाके नूर खुदा से ।
बढे़ चलो पाने नई मंजिल को ।।
थाम लो एक हाथ में बिसरी यादों की डोर ।
और पूरी चाहत के साथ,
कभी गिरकर कभी संभलकर,
बढ़ते रहो अपने निशाने कि ओर।।