वह जब कभी भी आती है

मेरे पास

व्रत या उपवास में

भड़ जाता है मेरा हृदय

करुणा, ममता, प्रेम से

सहज आश्चर्य से

देख कर उसकी हालत

सूखे फ़ूले फ़टे ओठ,

प्यास से व्याकुल कंठ

चेहरे पर थकान

पल पल झुकती नजर

और मन में विश्वास की शक्ति


मुझमे भी

बहने लगता है तब

अध्यात्मिकता का प्रवाह

बह जाते हैं जिसमें

सभी ईर्ष्या,द्वेष ,अवसाद ,विषाद

सभी दमित इच्छाएं

और बच जाती है मुझमें

सम्यक जीवन

जीने की अभिलाषा ....