हर घड़ी है इंतजार तुम्हारा

रेगिस्तान सा जल रहा हूं

बूंद बूंद को तरस रहा हूं

मनभावनी तुम जल्दी आना

साथ में बारिश भी ले आना

होठ मेरे सूख रहे हैं

मनभावनी पानी पिलाना

सांस मेरा छूट जाएगा

नहीं फिर तुम पछताना

मन भावनी तुम जल्दी आना

बरस जाना तुम प्यार बनके

मरुधर में भी उपवन खिलेंगे

प्यार में हम भीग जाएंगे

मरुधर में भी मंगल गायेंगे

हर घड़ी है इंतजार तुम्हारा

मनभावनी तुम जल्दी आना

~भरत सिंह