मेरी कविता

क्यों नाराज हो मुझसे मेरी खता बता दो

बातचीत बंद करने की कोई तो वजह बता दो

पसंद करता हूं मैं तुम्हें

तुम जानती थी या मैं जानता था

दुनिया से बताने की कोई वजह बता दो


दुख में साथी माना था तुमने 

सुख में भूल जाने की कला हमें भी सिखा दो

मैं बागी हो जाना चाहता था तुम्हारे लिए 

यह पीठ दिखाने वाला हुनर हमें भी सिखा दो 

बेवफा मैं तुम्हें नहीं कहता

क्यों हिम्मत नहीं जुटा पाई तुम मुझे स्वीकारने की 

कोई तो वजह बता दो


खुश हूं मैं तुम्हारी दीवानगी में 

मुझे खुश रहने दो

लिख रहा हूं मैं अपनी तन्हाई को

मुझे तो तुम अपना शायर ही रहने दो 

निभाओ तुम मजबूरियों के रिश्ते अपने

मुझे तो तुम अपना दीवाना ही रहने दो  

         ~भरत सिंह