
फैला अंतर में मोह जाल,
धूमिल सा गगन विशाल,
घना कोहरा छँटना होगा,
सूरज तुझको उगना होगा!
सूरज तुझको उगना होगा!
परछाई का यहां बसेरा,
जैसे दीपक तले अंधेरा,
सभी घरों तक जाना होगा,
हाँ, प्रकाश को बंटना होगा,
सूरज तुझको उगना होगा!
किसी एक का भाग्य नहीं,
तुझ पर कुछ का अधिकार नहीं,
धनी निर्धन का भेद छोड़,
सब की झोली भरना होगा,
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