
देखो....
आसमाँ झुक रहा है,
जैसे सलाम कर रहा है,
चट्टान रास्ता दे रही है,
कोई नदी मुड़ रही है|
रवि फीका हो गया है,
साँझ मुँह धो रही है,
खग शोर कर रहे हैं,
घर की याद आ रही है|
चट्टान रास्ता दे रही है,
कोई नदी मुड़ रही है|
उसे भी देर हो गयी है,
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