मुमकिन है कि अक्ल पे पर्दा पड़े जोरा,
कुछ ख्वाहिशे उफान पे आ पडें जोरा!
सुलह करा देना तू ही रूह से मेरी,
अमूमन किसी बात पर जो लड़ पड़ें जोरा!
जो पानी में ख़ून को भी मिला के बेचते हैं,
ऐसी क्या बात है उनमें जो मुझमे नही जोरा!
सिर्फ एक तमाशे का यहाँ मज़मून हूँ लेकिन,
वो कहें तो तमाशा यहीं बस रोक दूं जोरा!