खोये खोये से हम अपनी ही धुन में चले जाते है,
कोई आवाज़ न दे पीछे से मंज़र लौट नही पाते है!
तुमने इस हंसी में छिपे हसीं को देखा है कहीं,
मैंने ढूंढा बहुत सामने हर बार पर्दे आ जाते हैं!
यही तो खूबी है मेरे खुशबू-ए-चमन की,
हो जिधर भी शाम होते ही लौट आते हैं!
किसी ने दस्तक तो दी थी दिल की चौखट पे,
हम बोले देर है फल आने में अभी बीज बोते हैं!