मत पूछ वो सवाल जिसका जबाब सोया है, किनारों में बंधा तब से कोई सैलाब सोया है,

लगा दोगे कीमतें उसकी तुम भी नीलामी में, गर्त में डूबा हुआ मोती अभी नायाब सोया है,

तोड़ कर हर कैद उड़ना बस एक मकसद है, जाने कब से इनके दिलों में इंकलाब सोया है,

लुटा दिये गये खजाने मुहब्बत के नाम पे, आज भी कटे हुए हाथों का हिसाब सोया है,

बढ़ चला एक कुँवर फिर कोई फूल तोड़ने, उधर किसी के बाग़ का आखिरी गुलाब सोया है!