किसी रोज़

तोड़ कर फेंक दूं

मेरे ख्वाब के टुकड़े

तुम्हारी छत पर


तुम्हारी छत पर

चमकने लग जाएंगे

चांद सूरज के बिम्ब

जुगनूओं के मेले

और तितलियों के पर

जो उड़ते हैं

स्थिर आकाश में


तुम्हारी छत पर

नाचने लग जाएंगे

अधूरी रातों में तृप्त

रती कामदेव के जोड़े,

चांदणा पीते हुए चकोर

व्योम की तलाश में

भटकती मोरनियां


तुम्हारी छत पर

हंसने लग जाएंगे

शाही मोह में जकड़े हुए

ताकतवर राजाओं के बाजू

कुंवर साहब के हुड़दंग

राजकुमारियों का यौवन


किसी रोज

तोड़ कर फेंक दूं

मेरे ख्वाब के टुकड़े

तुम्हारी छत पर


Bharat Rajguru