क्यो सताती है खमोसी मुझे

क्यो विरह देके जाती है

आती है जब याद गाँव की

क्यू तू (खमोसी) टुट नही पाती है ,


अब तो

माँ भी बार बार बुलाती है

खेतों की भी याद सताती है

महिनो गुजर गये यहा

फिर भी ........

तू क्यू (खमोसी) टुट नही पाती है ,

अब तो बख्स दे मेरी जान तू

आज तो सो जाने दे

गाँव ना तो ना सही