जब माँ का सपूत लिपट तिरंगे में आँगन को आता होगा.......'s image
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जब माँ का सपूत लिपट तिरंगे में आँगन को आता होगा.......

बरसाती है नयन घटा , अम्बर जयकार गाता होगा 
लहू से सींची माटी का ,सीना चौड़ा हो जाता होगा

टूटती होगी चूड़ियाँ पर,आँखो से गर्व झलकता होगा
पिता के साये से जुदा,बचपन कोने में तड़पता होगा

हाथ जोड़े ईश्वर राह पर खड़ा अश्रु बहाता होगा ।
जब माँ का वीर लिपट तिरंगे में आँगन को आता होगा ।

होली के रंगों के बीच ,वो घर बेरंग रह जाता होगा
अंधियारी होती दीवाली,जो चिराग बुझ जाता होगा 

खेलने की उम्र में पिता की अर्थी उठाता होगा ।
श्रृंगार करता वो हाथ जब सिंद
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