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कभी वक्त मिले… तो पढ़ना मेरी कविताएं

कभी वक्त मिले… तो पढ़ना मेरी कविताएं

तुम पढ़ना मेरी कविताएं, जो मैंने रातों को लिखा है।
कुछ किस्सों को लिखा है, तो कुछ बातों को लिखा है।
तुम पढ़ना मेरी कविताएं, जो मैंने रातों को लिखा है।

खुद को मुसाफ़िर, और तुम्हें मंजिल लिखा है।
खुद को एक कश्ती, और तुम्हें साहिल लिखा है।।

खुद को कैदी और… तुम्हें आज़ाद लिखा है।
मैंने ख़ुद को बर्बाद और तुम्हें आबाद लिखा है।
और नाम कहीं भी पढ़ना मेरा… तो देखना
मैंने हर जगह… अपना नाम तुम्हारे नाम के बाद लिखा है।।


और इससे आगे ज़्यादा कुछ नहीं लिखा…
बस जुदाई के कुछ लम्हों को लिखा है, तो कुछ मुलाकातों को लिखा है।
हां! मैंने अपने शब्दों में,
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