कुछ लोग कम बोलकर अपने शब्दों को मायने दे जाते है, 

और कुछ इतना बोल लेते है की उनके वाक्य भी बेमायने हो जाते है|


माना की मुफ्त है,पर इस कदर इन्हे बर्बाद तो ना कीजिए, 

पानी की तरह होते है,इनके खारे होने तक का इंतज़ार ना कीजिए|