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रिवायत


कभी रिवायतों को भी तोड़ देना चाहिए,दायरों से बाहर जाकर कोई खुराफात की जाए,

हो जाए एक हद तैय शराफत की भी,ताक़ि कुछ आवारा ख्वाइशें रातों की मोहताज ना हो|

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