बाहर मौसम कैसा है?
क्योंकि भीतर मेरे बस पतझड़ है,
सूखे पत्तो की तरह ख़्वाब बिखरे है,
जो हवा के झोकों से ऊँचा उड़ तो सकते है,
पर बिन टहनी ऊंचाई पर टिक नहीं सकते|


बाहर मौसम कैसा है?
क्योंकि भीतर मेरे बस पतझड़ है,
सूखे पत्तो की तरह ख़्वाब बिखरे है,
जो हवा के झोकों से ऊँचा उड़ तो सकते है,
पर बिन टहनी ऊंचाई पर टिक नहीं सकते|