असमंजस में हु!


कि रहु उस कैद में जो घर चलाती है?

या छोड़ दू वो घर और खुदको इस कैद से आजाद करुँ?

गुलामी करता रहु बेच कर अपने सपने?

या सपनो का मालिक रहकर अपनी जिंदगी आबाद करू?