कमरा छोड़ के जबसे बालकनी में वक़्त बिताना शुरू किया है,
बारहवीं मंजिल से हमें देखकर किसीने मुस्कुराना शुरू किया है,
अब अपने समय को हमने उनकी घडी से चलना सिखा दिया,
नजरबंदी के इस माहौल में किसी से आंख-मिचौली का रिश्ता है हमने बना लियाl


कमरा छोड़ के जबसे बालकनी में वक़्त बिताना शुरू किया है,
बारहवीं मंजिल से हमें देखकर किसीने मुस्कुराना शुरू किया है,
अब अपने समय को हमने उनकी घडी से चलना सिखा दिया,
नजरबंदी के इस माहौल में किसी से आंख-मिचौली का रिश्ता है हमने बना लियाl