सोचा न था कि इतना बदल जाऊँगा— ????

तुझे खो कर भी तेरे ग़म में सँभल जाऊँगा। ????

महफ़िल में तेरे सामने अजनबी बन कर आऊँगा, ????

और जब तूने बात छेड़ी, मैं लफ़्ज़ बदल जाऊँगा। ????

ज़िद के उम्मीदी एक मासूम से बच्चे की तरह, ????

खुद ही अपनी कश्ती को डूबते देखकर लड़खड़ा जाऊँगा। ????

पर यदि मुझे यक़ीन हो तेरा लौट आने का, ????

तो मैं एक फूल बनकर तेरी राहों में ही बिखर जाऊँगा। ????❤️

✒️ बेनाम