सभी मेरे अदब के अन्दाज़ के क़ायल है, वो दीगर बात, इन कंधो को ज़िंदगी की हसरतों के बोझ ने झुका दिया। लोग मेरे ख़ुशी के आसूँ पर रस्क़ करते है, वो अनजान नहीं जानते, माज़ी के किस दर्द ने इन पथरीली आँखो को रुला/ भीगा दिया। सर्द मौसम में हर आरज़ू जो बर्फ़ ही बर्फ़ है, हक़ीक़त की तपती धूप के बेपनाह असर से, एक पहाड़ को तैरता पानी का समंदर बना दिया।   कहने को सबकी आँखों में मैंने जीत लिए सारे मुक़ाम, पर शायद लोग जानकर भी बनते है अनजान इस ज़र्रे को मुक़्क़दर ने ही दुनिया का सिकंदर बना दिया। ज़िंदगी पर किताबें कई लिख कर मैं हो गया मशहूर, हर महफ़िल में बस मेरे क़िस्सों का चर्चा है पर कल नन्हें बच्चें के एक मासूम सवाल ने मुझे हिला दिया। सभी मेरे अदब के अन्दाज़ के क़ायल है, वो दीगर बात, इन कंधो को ज़िंदगी की हसरतों के बोझ ने झुका दिया।