आज अँगने में मेरे किसी के नैनों की कुछ बौछारे पड़ी , बिन बारिश इस बंज़र जमीन पर  फिरसे कुछ खिलने की एक उम्मीद जगी , कुछ समंदर सा था उसकी आखों में जो इस जमीन को भी संग डुबो चली , ना जाने क्या हाल था उस दिल का , एक खूबसूरत सी मुस्कान लिए दर्द जो अपना वो लुका रही थी , चांदनी कहु या क़यामत कहु वो एक ऐसी रात आयी थी , प्यार उसका बह रहा था  और दर्द ये ज़मीन सौंक रही थी ..