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अनभिज्ञता


सोचते हो तुम आलिशान मकान बनाओगे,शान से रहोगे, रंगीन शाम बिताओगे,

शायद तुमने सुबह का अखबार नहीं पढ़ा है,मकान और शाम का अंजाम नहीं पढ़ा है

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