शायद तू मजबूर था,
जो तूने मुझे दोषी माना,
सच्चाई से दूर था,
जो तूने मुझे न पहचाना,
जीवन दिया मैंने जिसे,
उसी कर्म में चूक हुई,
सब सच बोला मैंने,
बातें सब दो टूक हुईं,
मेरे प्रयासों को न जाना,
जो तूने मुझे दोषी माना,
तुझ पर कुछ दबाव था,
इसलिए न्याय से दूर हुआ,
कुछ इच्छाएं पूरी करने को,
शायद तू मजबूर हुआ,
जीवन मेरा तेरे कारण,
अब अधर में पड़ा है,
उम्मीद है अब बस उसी से,
न्यायधीश जो सबसे बड़ा है|
"बेचैन"
