माँ - बाप का साथ था छूटा,
बस तेरा ही सहारा था,
छोड़ गईं तुम उस भाई को,
जो तुम्हे जान से प्यारा था,
बड़ी बहिन थीं तुमको तो,
माँ का फर्ज निभाना था,
बीच राह में छोड़ जाओगी,
यह मैंने न जाना था,
यूँ गईं मिल भी न पाया,
मजबूरी बहुत सताती है,
जब भी आखें बन्द करता हूँ,
याद तुम्हारी आती है,
मुश्किल है विश्वास करना,
कि तुम हमें छोड़ कर चली गईं,
आ जाओगी यूँ लगता है,
जैसे तुम हो यहीं कहीं,
आखें नम हैं याद में तेरी,
ईश्वर ने अन्याय किया,
जब तुम्हारी जरुरत थी,
तभी तुम्हें भी छीन लिया,
दुनिया की सारी खुशियाँ,
मुझको अब न भाती हैं,
जब भी आखें बन्द करता हूँ,
याद तुम्हारी आती है,
मेरे सब्र का बांध है टूटा,
अब जीना दुस्वार हुआ,
बिन तेरे ओ मेरी बहिना,
बेचैन कितना लाचार हुआ,
बिन तेरे मेरी बहिना,
दुनिया लगे पराई है,
कहीं जरा सी आहट हो तो,
यूँ लगे कि तुम आई हो,
जीवन में मेरे आपकी,
कमी बहुत सताती है,
जब भी आखें बन्द करता हूँ,
याद तुम्हारी आती है|
"बेचैन"

